कादरचौक में संचालित हैं कई अवैध निजी अस्पताल, ग्रामीणों की डीएम से जांच की मांग
बदायूं। जनपद के कादरचौक क्षेत्र में संचालित निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। पूर्व ब्लॉक प्रमुख कौशल कुमार के नेतृत्व में क्षेत्र के कई ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए कादरचौक के उसैहत रोड स्थित जन कल्याण पॉलीक्लिनिक समेत कई निजी अस्पतालों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि क्षेत्र में कई अस्पताल और क्लीनिक स्वास्थ्य विभाग के नियमों को दरकिनार कर संचालित किए जा रहे हैं। इन संस्थानों में बिना वैध अनुमति और विशेषज्ञ चिकित्सकों के अवैध रूप से डिलीवरी एवं गर्भपात (अबॉर्शन) जैसे गंभीर चिकित्सीय कार्य किए जा रहे हैं, जिससे मरीजों की जान को खतरा बना हुआ है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ अस्पतालों द्वारा बवासीर जैसी बीमारियों के इलाज को लेकर “गारंटी के साथ पूर्ण उपचार” का दावा करते हुए भ्रामक प्रचार किया जा रहा है, जो चिकित्सा मानकों और नियमों के विपरीत है। साथ ही अस्पतालों में कार्यरत स्टाफ की योग्यता और डॉक्टरों की डिग्रियों पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कई जगह बिना मान्यता और बिना आवश्यक पंजीकरण के अस्पताल संचालित किए जा रहे हैं।
पूर्व ब्लॉक प्रमुख कौशल कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण क्षेत्र में अवैध अस्पतालों का नेटवर्क फल-फूल रहा है। उन्होंने एक पुराने मामले का उल्लेख करते हुए बताया कि राधिका नर्सिंग होम में डिलीवरी के दौरान एक नवजात की मौत हो गई थी, लेकिन उसके बावजूद विभाग द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उनका आरोप है कि ऐसे कई मामले सामने आते हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा उन्हें दबा दिया जाता है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि स्वास्थ्य विभाग केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि क्षेत्र में संचालित सभी निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की सघन जांच कराए। उन्होंने कहा कि केवल योग्य, डिग्रीधारी और विधिवत पंजीकृत चिकित्सकों को ही अस्पताल संचालन की अनुमति दी जाए, ताकि आम जनता की जान के साथ हो रहे खिलवाड़ पर रोक लग सके।
फिलहाल जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंप दिया गया है। अब सभी की निगाहें स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।



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