कुल शरीफ की रस्म के साथ उर्स ए फरीदी सम्पन्न,तीन किताबों का हुआ इजरा उमड़े अकीदतमंद, मुल्क व कौम की सलामती और खुशहाली की मांगी दुआएं बदायूं। हर साल की तरह इस साल भी बाबा फरीद के पोते कुतबे बदायूं मुफ्ती शाह मोहम्मद इब्राहिम फरीदी का दो रोज़ा सालाना उर्स ए फरीदी के दूसरे दिन सुबह नौ बजे कुरआन ख्वानी, के बाद नतिया महफिल का इनकाद किया गया। कुल की फातिहा से पहले उलेमाओं ने खिताब फरमाया। साहिबे सज्जादा खानकाह आबादानिया, फरीदिया बदायूं शरीफ, हज़रत मौलाना मोहम्मद अनवर अली फरीदी (सुहैल फरीदी) साहब ने बड़ा इल्मी बसीरत अफ़रोज़ बयान से हाज़रीन को दिलों में ईमान की रोशनी पैदा की। हमेशा की तरह इस बार भी बुखारी शरीफ़ की पहली हदीस "इन्नमल आमा लो बिन नियत" से अपने बयान का आगाज़ किया। आपने फरमाया हर अमल का दारो मदार नियत पर है यानी जिस नियत से काम किया जाएगा अल्लाह तआला उसी नियत के ऐतबार से अज्र अता फरमाएगा, मसलन आप किसी बीमार की दुनियावी एतबार से अयादत करने गए तो अल्लाह ताअला आपको आयात करने का अज्र सवाब देगा यदि आप बीमार को देखने यह मानकर गए के अयादत करना रसूल की सुन्नत है तो अल...