उर्दू की मशहूर-ओ-मअरुफ़ अफ़साना-निगार पद्मश्री जीलानी बानो का इंतक़ाल बदायूं। बैनुल अकवामी शोहरत आफ़्ता उर्दू की मशहूर-ओ-मअरुफ़ अफ़साना-निगार जीलानी बानो का तकरीबन 90 साल की उम्र में हैदराबाद में इंतक़ाल हो गया। वे काफी वक्त से अलील थी। ये मालूमात उनके ममेरे भाई अल्हाज आज़म फरशोरी बदायूंनी ने देते हुए बताया कि जीलानी बानो की पैदाइश 14 जुलाई 1936 को यूपी के बदायूँ शहर में हुई थी। उनके वालिद मौलाना हैरत बदायूंनी मअरूफ़ अदीब और शायर थे, जिनके अदबी माहौल ने बचपन से ही उनकी फ़िक्री-ओ-तख़लीक़ी तरबियत की। उर्दू अदब से लगाव उन्हें अपने वालिद से विरसे में मिला था। उनकी परवरिश ख़ालिस अदबी माहौल में हुई। इनके घर अपने वक्त के बड़े मुसन्नफीन मसलन सज्जाद ज़हीर,मखदूम मुही उद्दीन,जिगर मुरादाबादी कृष्ण चंद्र और मजरूह सुल्तानपुरी वगैरह का आना जाना लगा रहता था। इब्तिदाई उम्र से ही इन्होंने मीर तकी मीर, ग़ालिब, इकबाल, सआदत हुसैन मिंटू,अस्मत चगताई, गौरकी,बेदी, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, मिज़ाज और अहमद नदीम क़ासमी समेत तमाम बड़े बड़े अदवा का कलाम पढ़ डाला।इन अज़ीम मुसन्नफीन की तखलीकात के मुताले ने इनकी अदबी सला...