माह-ए-रमज़ान का चांद आया नज़र: इबादत, बरकत और रहमतों का महीना शुरू



:दुनिया भर के साथ-साथ भारत में भी बरकतों और रहमतों के पाक महीने 'रमज़ान-उल-मुबारक' का चांद नज़र आ गया है। इसी के साथ फिजाओं में इबादत की खुशबू घुल गई है और मस्जिदों में तरावीह की गूंज शुरू हो चुकी है। यह महीना हमें सब्र, शुक्र और इंसानियत की सेवा का पाठ पढ़ाता है।

 इबादत और भाईचारे का संदेश

रमज़ान सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि अपनी रूह को पाक करने और दूसरों के दर्द को समझने का नाम है। इस महीने में जकात और खैरात के जरिए गरीबों की मदद की जाती है, जो समाज में बराबरी का संदेश देता है।

एक और खूबसूरत शेर के साथ इस मुबारक महीने का स्वागत करते हैं:

ऐ माह-ए-रमज़ान आहिस्ता चल, अभी काफी कर्ज चुकाना 

है,अल्लाह को करना है राजी और गुनाहों को मिटाना है।"


 खास तैयारियां

बाज़ारों में रौनक बढ़ गई है। सहरी और इफ्तार के लिए खजूर, फल और पकवानों की दुकानें सज चुकी हैं। उलेमाओं ने अपील की है कि इस पाक महीने में इबादत के साथ-साथ देश की अमन-चैन और खुशहाली के लिए भी दुआएं की जाएं।

आप सभी को बदायूं समाचार एक्सप्रेस की ओर से रमज़ान की तहे दिल से मुबारकबाद!

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