मुख्यमंत्री का आदेश भी बेअसर, आउटसोर्सिंग कर्मियों की वेतन के आभाव में होली रही फीकी

बदायूं,। स्वास्थ्य विभाग में काम करने वाली अलग-अलग आधा दर्जन एजेंसियों ने मुख्यमंत्री का आदेश भी हल्के में ले लिया है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग के अलग-अलग पदों पर तैनात कर्मचारियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। कर्मचारियों को होली के त्योहार पर भी तीन-चार महीने का बकाया भुगतान नहीं दिया गया है। इसीलिए कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट है। कर्मचारियों की होली तो फीकी रही है अब ईद का त्योहार भी फीका होने वाला है। विभाग की ओर से हो रहे पत्राचार पर भी ध्यान नहीं है।

फरवरी महीने में ही मुख्यमंत्री का आदेश आ गया कि चार मार्च को होली का त्योहार है। इसलिए त्योहार से पहले ही सभी नियमित, संविदा, आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का वेतन जारी कर दिया जाये। मगर स्वास्थ्य विभाग में स्थानीय स्तर पर मुख्यमंत्री के इस आदेश को ठेंगा दिखाया गया। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी आउटसोर्सिंग कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को मानदेय नहीं दिया है। मानदेय भी किसी एक महीने का नहीं रूका है पिछले तीन-चार महीने से ही मानदेय नहीं दिया है। इससे कर्मचारी परेशान हैं, मगर अधिकारी आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को बजट देने का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया है। जबकि एजेंसिया कह रही हैं कि बजट का संकट है। बतादें कि जिले में स्वास्थ्य विभाग में अवनि परधि कार्यदायी संस्था के 70 कर्मचारी हैं जिसमें से 37 कर्मचारी जिला पुरुष अस्पताल में हैं और बाकी महिला अस्पताल एवं सीएमओ के अधीन देहात के अस्पतालों पर तैनात हैं। वहीं सीएमओ के अधीन अन्य कार्यदायी संस्थाओं से 52 कर्मचारी हैं जो आउटसोर्सिंग संस्था से हैं। इनको वेतन नहीं दिया है, जबकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि विभाग की ओर से तीन मार्च को ही बजट दे दिया है और एजेंसियां वेतन रोके हुए हैं।

आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का मानदेय रुका है। आउटसोर्सिंग के 52 कर्मचारी हैं। विभाग से पैसा एजेंसियों को ट्रांसफर तीन मार्च को ही हो गया है। बाकी एजेंसियों ने क्यों नहीं दिया है इसको लेकर सीएमओ की ओर से फिर पत्राचार करेंगे। 

-अरविंद राणा, प्रभारी डीपीएम राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन


जिला अस्पताल में अवनि परधि के 37 कर्मचारी हैं। कर्मचारियों का करीब चार महीने का मानदेय है। हमारे स्तर से शासन को चार बार पत्र लिखा गया है एजेंसियों को भी पत्र भेजा है। हमारे स्तर पर कोई दिक्कत नहीं है भुगतान एजेंसियों को देना है।

 - डॉ. अमित कुमार वार्ष्णेय, सीएमएस जिला पुरुष अस्पताल

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