सीएमओ दफ्तर पर गरजी आशा कार्यकत्रियां, सौंपा ज्ञापन 

तीन दिन में मांगें पूरी न हुईं तो होगा आंदोलन 

  बदायूं। उप्र आशा वर्कर्स यूनियन की जिलाध्यक्ष जौली वैश्य के नेतृत्व में आशा कार्यकत्रियों ने लंबित मांगों को लेकर सीएमओ कार्यालय पर प्रदर्शन किया और सीएमओ डॉ. मोहन झा को ज्ञापन सौंपा।

यूनियन पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार संगठन की मांगों को लेकर लगातार वादाखिलाफ़ी कर रही है। बीते छह फरवरी को डिप्टी सीएम के साथ 15 दिसंबर से जारी आंदोलन के 13 सूत्रीय मांगपत्र पर वार्ता हुई थी। इसमें पहली मांग को आंशिक रूप से स्वीकार करने और अन्य मांगों पर पूर्ण सहमति जताते हुए लिखित समझौता हुआ था। इसके क्रियान्वयन के लिए अपर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर नौ फरवरी को बैठक भी हुई थी, लेकिन उसके बाद से अगले चरण की वार्ता नहीं बुलाई गई।

इस वजह से राज्य वित्त से मिलने वाली 1,500 रुपये की राशि को बढ़ाकर 6,000 करने, मातृत्व अवकाश देने, साप्ताहिक व राष्ट्रीय छुट्टियां लागू करने, पांच लाख रुपये के अतिरिक्त कैशलेस स्वास्थ्य बीमा और 20 लाख रुपये की जीवन बीमा राशि सहित सभी प्रोत्साहन राशियों के पुनरीक्षण पर कोई ठोस स्थिति नहीं बन सकी है। आशाओं ने साफ किया है कि यदि उनकी जायज मांगें जल्द नहीं मानी गईं, तो वे काम ठप कर बड़ा आंदोलन करने को विवश होंगी।

जिलाध्यक्ष ने बताया कि आशाओं को आयुष्मान कार्ड, राज्य वित्त की ₹750 की दर से 28 माह की प्रोत्साहन राशि, और कोविड-19 के एक हजार प्रति माह का भुगतान नहीं मिला है। इसके अलावा कुष्ठ रोग, टीबी, और 1 जनवरी 2023 से जारी आशा आभा आईडी सृजन के कार्यों का पारिश्रमिक भी अटका हुआ है। जबकि 9 फरवरी को हुई कमेटी की बैठक के बाद तीसरे चक्र में स्वास्थ्य मंत्री की मध्यस्थता में समझौते को अंतिम रूप देने का विश्वास दिलाया गया था। मगर समझौते पर अमल नहीं किया गया।

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