वारिस रफ़ी को 'कामनी अवार्ड' मिलने की खुशी में शायरों ने सजाई महफिल, शॉल ओढ़ाकर किया इस्तक़बाल

बदायूं। ज़िले के वरिष्ठ शायर वारिस रफी के सम्मान में मोहल्ला सोथा स्थित फरशोरी मंजिल पर बज़्मे-अहबाब द्वारा एक मुशायरा आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ई० वारिस रफी व अध्यक्ष अनवर आलम  फरशोरी रहे। मुशायरे का संचालन वरिष्ठ उस्ताद शायर डॉ. मुजाहिद नाज़ बदायूंनी ने किया। 

बता दें  कि फिरोजाबाद के प्रसिद्ध शायर रफीउद्दीन कामिनी की बरसी पर कामिनी उर्दू केंद्र के तत्वावधान में आयोजित एक कार्यक्रम में वारिस रफ़ी बदायूनी को 'कामिनी अवार्ड' से नवाज़ा गया गया था। यह अवार्ड उनकी  साहित्यिक सेवाओं के लिए उन्हें दिया गया । 

अवार्ड से सम्मानित होने के बाद वारिस रफी के बदायूं वापस आने पर उनके सम्मान में बज़्मे-अहबाब द्वारा मुशायरा आयोजित किया गया। जिसमें शहर के चुनिंदा शायरों ने अपने अपने कलाम पेश किये।

सर्वप्रथम वारिस रफी को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया उसके बाद नाते-पाक से मुशायरे का आग़ाज़ किया गया। 

डॉक्टर एहसान रज़ा ने पढ़ा-

 ज़ीस्त को बा-उसूल करने लगे। 

हम भी जीना कुबूल करने लगे। 


उस्ताद शायर डा. मुजाहिद नाज़ ने पढ़ा- 


किसी दल में अजब दावा किया है, 

मिरा घर भी किसी भगवान का है। 


ई० वारिस रफी ने पढ़ा-

चाँद पर पहुँचने का फ़ख़्र तो बजा लेकिन, 

आसमाँ से आगे तक मंज़िलें हमारी हैं। 


अलीगढ़ से आए सरवर अली पटियालवी ने पढ़ा-

साँसों का सिलसिला भी कोई ज़िन्दगी नहीं, 

जिसका ज़मीर मर गया वो ज़िन्दा लाश है।


वरिष्ठ शायर सुरेंन्द्र नाज़ ने पढ़ा-

जिस्म बेजान है लेकिन मिरा मन ज़िन्दा है , 

नफ़रतों में भी मुहब्बत का सुख़न ज़िन्दा है। 


इक़्तिदार इमाम ने पढ़ा-

मैंने इस तरह से रक्खा तिरे पर्दे का ख़्याल, 

जो भी देखे तिरी तस्वीर तो चेहरा न दिखे।


मुशायरे के आयोजक आज़म फ़रशोरी ने पढ़ा-

यू खुद को आज़माकर देखता हूँ, 

मैं मोती हूँ कि पत्थर देखता हूँ। 


युवा शायर उज्जवल वशिष्ठ ने पढ़ा-

सुख-दुख तो आते-जाते हैं, 

कैसा रोना कैसे आँसू। 


मुशायरे के अंत में अध्यक्ष अनवर आलम ने अपने वक्तव्य में कहा कि अगर किसी बदायूं के व्यक्ति का बदायूँ से बाहर सम्मान होता है, तो वह उस व्यक्ति का ही सम्मान नहीं बल्कि हमारे बदायूँ का सम्मान है। 

इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से उम्मी भाई, शब्बू भाई व बिलाल अहमद एडवोकेट आदि लोग उपस्थित रहे।

 



 

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