शायर सरवर पटियालवी के सम्मान में बज़्मे अहबाब ने सजाई शेअरी नशिस्त

बदायूं। गुरुवार देर शाम बज़्म -ए-अहबाब की जानिब से एक शेअरी नशिस्त का इनअकाद अलीगढ़ से तशरीफ़ लाए शायर सरवर पटियालवी के सम्मान में फ़रशोरी हाउस मोहल्ला सोथा में किया गया जिसकी सदारत वरिष्ठ शायर सुरेंद्र कुमार नाज़ बदायूंनी ने की।

 सुरेंद्र नाज़ बदायूंनी ने सबसे पहले नात ए पाक पढ़ी - 

मैं नात ए पाक जब लिखता हूं आक़ा, 

क़लम झुकता है अक्षर बोलते हैं।

उन्होंने ग़ज़ल सुनाई -

तेरी खुशबू हूँ तो कर अपने हवाले मुझको, 

 इससे पहले कि कोई और चुरा ले मुझको।


मुख्य अतिथि सरवर पटियालवी ने पढ़ा -

वो खालिक है वो मालिक है वो ही रहमान है मेरा।

यही मेरा अक़ीदा है यही ईमान है मेरा।।


सादिक अलापुरी ने बेहतरीन शायरी पेश की -

खता ये है मेरी मैं आईना हूं,

मुझे हंस-हंस के पत्थर देखता है।


हाजी आज़म फरशोरी ने पढ़ा -

गुफ्तगू में शऊर पैदा कर,

मेरा दावा है संग बोलेंगे।


शम्स मुजाहिदी बदायूंनी ने यूं कहा -

वक्त दोस्तो सबका एक सा नहीं रहता,

भीक मांगते देखा हमने ताजदारों को।


समर बदायूंनी ने सुनाया -

आग ऐसी बेईमानी की लगी,

खेतियां सब जल गईं ईमान की।


युवा शायर अरशद रसूल ने कहा -

अगर हिंदू-मुसलमां का यहां झगड़ा नहीं होता,

हमारे मुल्क का नक्शा कभी ऐसा नहीं होता।


इक्तिदार इमाम ने सुनाया- 

ईमान की दहलीज़ पे इस्लाम के दर पर, 

कुर्बान न हो पाए तो सर किसके लिए है।


काव्य गोष्ठी में अलीगढ़ से तशरीफ़ लाए मशहूर शायर सरवर पटियालवी का ज़ोरदार इस्तकबाल करते हुए उन्हें सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन अरशद रसूल ने किया

 इस मौके पर सैय्यद रूमान हाशमी, अल्हाज सालिम फरशोरी, रजत गौड़, सय्यद सलमान हाशमी आदि श्रोतागण मौजूद रहे। जिन्होंने शायरों को जमकर दाद दी। अल्हाज आज़म फरशोरी ने सभी मेहमानों का आभार व्यक्त किया।



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