कैंसर में रोबोटिक सर्जरी से 10 गुना बेहतर नतीजे : डॉ. सुनील डागर
मैक्सफोर्ट हॉस्पिटल में यशोदा मडिसिटी की नियमित ओपीडी शुरू
(स्वास्थ्य के प्रति जानकारी देते डॉ. सुनील डागर, डॉ. निवेदिता ढींगरा व डॉ. सतिंदर कौर।)
अलीगढ़। अक्सर लोग शरीर में होने वाले छोटे बदलावों या असामान्य लक्षणों को सामान्य कमजोरी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे गंभीर बीमारियां समय पर पकड़ में नहीं आ पातीं। देश में 60 से 70 प्रतिशत आबादी खून की कमी (एनीमिया) से जूझ रही है। महिलाओं में असामान्य ब्लीडिंग या डिस्चार्ज और पुरुषों व बुजुर्गों में बिना स्पष्ट कारण खून की कमी होना गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (जीआई) कैंसर जैसे गंभीर रोगों का भी संकेत हो सकता है। उक्त बातें वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. निवेदिता ढींगरा ने कहीं। उन्होंने बताया कि समय पर जांच और विशेषज्ञ परामर्श न मिलने से ये बीमारियां देरी से सामने आती हैं, जिससे उपचार जटिल हो जाता है। इसी चिंता को दूर करने और उच्च स्तरीय स्वास्थ्य परामर्श के लिए यशोदा मेडिसिटी ने अलीगढ़ के रामघाट रोड स्थित मैक्सफोर्ट हॉस्पिटल के साथ मिलकर नियमित सुपर स्पेशलिटी ओपीडी की शुरुआत की है।
रामघाट रोड स्थित एक होटल में पत्रकार वार्ता के दौरान यशोदा मेडिसिटी के सीओओ डॉ. सुनील डागर, हेमेटोलॉजी, हेमेटो ऑन्कोलॉजी एवं अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण निदेशक व प्रमुख डॉ. निवेदिता ढींगरा व स्त्री रोग कैंसर एवं रोबोटिक सर्जरी की वरिष्ठ निदेशक डॉ. सतिंदर कौर ने संयुक्त रूप से बताया कि इस पहल से मैक्सफोर्ट हॉस्पिटल में डॉ. चितरंजन सिंह के सहयोग से अलीगढ़ व आसपास के मरीजों को अब बड़े शहरों की दौड़ लगाए बिना अपने ही शहर में दिल्ली-एनसीआर के शीर्ष विशेषज्ञों की सलाह मिलेगी। यशोदा मेडिसिटी के सीओओ डॉ. सुनील डागर ने कहा कि 1200 बेड के अत्याधुनिक मल्टी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल यशोदा मेडिसिटी का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के नागरिकों तक उत्कृष्ट क्लीनिकल सेवाएं और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं सीधे पहुंचाना है। आउटरीच ओपीडी के माध्यम से अस्पताल के विशेषज्ञ सीधे मरीजों से जुड़ते हैं, ताकि बीमारी का समय पर डायग्नोसिस और सही उपचार की दिशा तय की जा सके। उन्होंने रोबोटिक तकनीक पर बताया कि इसमें सर्जन कंसोल पर बैठकर 10 गुना बेहतर दृश्यता के साथ रोबोटिक आर्म्स के जरिए सर्जरी करते हैं, जिससे मरीज को कम दर्द, नगण्य ब्लीडिंग और बेहद तेजी से रिकवरी का लाभ मिलता है।
वहीं, डॉ. निवेदिता ढींगरा ने बताया कि खून की कमी को रोकने के लिए सबसे पहले अपनी डाइट में सुधार जरूरी है। हमारी डाइट हरी-भरी और रंग-बिरंगी होनी चाहिए, जिसमें फल, सलाद, सब्जियां और दालें शामिल हों। इसके अलावा पारंपरिक रूप से लोहे की कढ़ाई में खाना पकाना और गुड़-चना खाना आयरन का बेहतरीन घरेलू स्रोत है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि थकान बनी रहे, सीढ़ियां चढ़ने या काम करने पर सांस फूले, त्वचा में पीलापन दिखे, शरीर या मसूड़ों-नाक से ब्लीडिंग हो, नीले निशान पड़ें अथवा बिना वजह दो से तीन हफ्ते तक बुखार और जोड़ों में दर्द रहे, तो इसे केवल घरेलू उपायों तक सीमित न रखें। तुरंत सीबीसी (कंप्लीट ब्लड काउंट) टेस्ट कराएं। नसों में खून का थक्का जमने (डीवीटी) की स्थिति में अलीगढ़ में उपलब्ध अल्ट्रासाउंड डॉप्लर जांच से समय रहते सही पहचान हो जाती है और अब आधुनिक ओरल दवाओं से इसका सुरक्षित इलाज संभव है। अस्पताल की स्त्री रोग कैंसर एवं रोबोटिक सर्जरी की वरिष्ठ निदेशक डॉ. सतिंदर कौर ने कहा कि छोटे शहरों में महिलाएं अक्सर अपनी समस्याओं को छिपाती हैं या खुद से दवाएं लेकर बैठ जाती हैं। जब असहनीय दर्द होता है, तब वे अस्पताल पहुंचती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को यह भ्रम दिमाग से निकाल देना चाहिए कि तीसरी या चौथी स्टेज में कैंसर का इलाज नहीं हो सकता। समय पर सही दिशा और आधुनिक रोबोटिक सर्जरी के जरिए 90 प्रतिशत से अधिक सफलता और कम खर्च में पूरा उपचार संभव है। रोबोटिक सर्जरी में बिना किसी बड़े चीरे और खून के नुकसान के सटीक ऑपरेशन होता है, जिससे मरीज अगले ही दिन डिस्चार्ज होकर अपने घर लौट सकता है।
वहीं, मैक्सफोर्ट हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. चितरंजन सिंह ने कहा कि इस सेवा से अब अलीगढ़ और आसपास के गंभीर मरीजों को बार-बार दिल्ली-एनसीआर जाने की परेशानी और अतिरिक्त खर्च से राहत मिलेगी। पत्रकार वार्ता के दौरान रविन्द्र तिवारी, अतुल शर्मा आदि भी मौजूद रहे।


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