हजरत मजाक मियां के उर्स में सजा नातिया मुशायरा
डॉ मुजाहिद नाज़ बदायूंनी के नेतृत्व में शायरों ने मजार-ए-मुबारक पर की चादरपोशी
बदायूं : शहर के सागरताल नवादा रोड स्थित कुत्बे औलिया हजरत मजाक मियां साहब के उर्स पर नातिया मुशायरे की रूहानी महफिल सजी। गद्दी नशीन हजरत सैय्यद ख्वाजा मोहम्मद इख्तियार अली शाह और हजरत ख्वाजा सैय्यद आसार अली शाह की सरपरस्ती में हुए इस आयोजन में अकीदतमंदों का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
मुशायरे का आगाज शायरों द्वारा वरिष्ठ उस्ताद शायर डॉ मुजाहिद नाज़ बदायूंनी के नेतृत्व में मजार-ए-मुबारक पर गुलपोशी व चादरपोशी के साथ हुआ, जहां मुल्क में अमन-चैन की मन्नतें मांगी गईं। इसके बाद मुशायरा कन्वीनर मुहम्मद शमसुद्दीन शम्स और अफज़ल अज़ीज़ द्वारा शायरों का इस्तकबाल किया गया।फिर नातिया कलाम का दौर शुरू हुआ, जिसकी निजामत मशहूर उस्ताद शायर डा. मुजाहिद नाज बदायूंनी ने की।
वरिष्ठ शायर डॉ मुजाहिद नाज़ बदायूंनी ने पढ़ा-
फर्श से फैली है खुशबू अर्श पर, जब भी आका को पसीना आ गया।
महफिल में डा. नासिर बदायूंनी ने
इस्लाम का शेवा है आतिश को बुझा देना... सुनाकर मोहब्बत का पैगाम दिया,
डा. शम्स मुजाहिदी ने साहिबे मज़ार के प्रति अकीदत जताते हुए पढ़ा कि -
दुनिया में जिसकी यारो मुझको तलाश थी, वो सब अता हुआ रौजा-ए-मजाक से।
अहमद अमजदी ने समा बांधा -
हाल किया होता "अहमद" ज़रा सोचिए , आप रहमत न होते जहाॅं के लिए।
डॉ दानिश बदायूंनी ने पढ़ा -
वाइज की जब बात सुनी इक मयकश ने, बोतल रखी छोड़ गया मयखाने में।
अरशद रसूल ने कलाम पेश किया -
भटकता फिरता हूं मैं जा बजा मज़ाक़ मियां, तुम्ही बताओ कोई रासता मज़ाक मियां।
सलमान मज़ाकी ने सुनाया -
कितनी रातें यहां गुज़ारी हैं, इक मदीने में शाम हो जाए।
बुजुर्ग शायर सगीर सैफी ने पढ़ा -
आपकी उम्मत में मुझको रब ने पैदा कर दिया, दौलते ईमान से मेरा दामन भर दिया।
सभी शायरों को दरगाह के सज्जादा नशीन पीरज़ादा हजरत ख्वाजा सय्यद मोहम्मद इख्तियार अली शाह अल मज़ाकी व हजरत ख्वाजा सय्यद आसार अली शाह अल मज़ाकी ने खास दुआओं से नवाजा। इस मौके पर सय्यद मोहम्मद इज़हार अली शाह मजाकी, सय्यद मोहम्मद फ़ज़ल अली शाह मजाकी, अफ़ज़ल अज़ीज़ खान पत्रकार, मोहम्मद इकराम मज़ा की, मोहम्मद आमीन मियां मजाकी, सय्यद मोहम्मद दीदार अली, सय्यद मोहम्मद दिलदार अली, सय्यद मोहम्मद दयार अली आदि बहुत से अकीदतमंद मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में फातिहा ख्वानी हुई और देश की सलामती व तरक्की के लिए खास दुआ मांगी गई। इसके बाद सभी में तबर्रुक बांटा गया।


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