जामिया हमदर्द वोकेशनल एंड स्किल सेंटर में हकीम अब्दुल हमीद की याद में अकीदत के साथ मनाया फाउंडर्स डे
बदायूँ। जामिया हमदर्द के संस्थापक, महान यूनानी चिकित्सक, शिक्षाविद्, समाजसेवी और कौम के सच्चे हमदर्द हकीम अब्दुल हमीद साहब रहमतुल्लाह अलैह के यौम-ए-पैदाइश के अवसर पर फाउंडर्स डे का समारोह जामिया हमदर्द वोकेशनल एंड स्किल सेंटर, बदायूँ में अकीदत और गरिमापूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, चिकित्सकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा गणमान्य नागरिकों ने भाग लेकर हकीम साहब की महान सेवाओं और उनके मिशन को याद किया।
कार्यक्रम के स्वागत भाषण में एलुम्नाई एसोसिएशन ऑफ जामिया हमदर्द के सचिव डॉ. शकील अहमद ने हकीम अब्दुल हमीद साहब की जिंदगी और उनकी उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हकीम साहब ऐसी अज़ीम शख्सियत थे, जिनकी कथनी और करनी में कोई फर्क नहीं था। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी इल्म, तालीम, तहकीक, तिब्ब और इंसानियत की खिदमत के लिए समर्पित कर दी।
डॉ. शकील अहमद ने कहा कि “तुम्हारी खूबियां बाकी, तुम्हारी नेकियां ज़िंदा” हकीम साहब की जिंदगी पर पूरी तरह सच्ची साबित होती है। जब भी हिंदुस्तान और उसके सच्चे हमदर्दों की तारीख लिखी जाएगी, हकीम अब्दुल हमीद साहब का नाम सुनहरे हुरूफ में लिखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि बेहद सीमित संसाधनों के दौर में हकीम साहब ने एक ऐसा तारीखी ख्वाब देखा, जिसकी ताबीर आज जामिया हमदर्द की शक्ल में हमारे सामने है। तुगलकाबाद की जमीन से शुरू हुआ उनका यह सफर आज एक ऐसे प्रतिष्ठित तालीमी इदारे में बदल चुका है, जो इल्म, तालीम, तहकीक और इंसानियत की खुशबू देश-विदेश तक पहुंचा रहा है।
डॉ. शकील अहमद ने कहा कि हकीम साहब की दूरअंदेशी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने आने वाली नस्लों की जरूरतों को बहुत पहले समझ लिया था। जामिया हमदर्द की तरक्की उनके उस महान विजन का परिणाम है। उन्होंने कहा कि ग़ालिब अकादमी, दिल्ली और इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर, नई दिल्ली सहित विभिन्न इल्मी और सामाजिक संस्थाओं के विकास में भी हकीम साहब की सेवाओं को भुलाया नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि हकीम अब्दुल हमीद साहब का दुनिया से जाना सिर्फ एक इंसान का जाना नहीं, बल्कि एक पूरे दौर का जाना था। लेकिन उनके इल्मी, तालीमी, तिब्बी, अदबी और सामाजिक कारनामों ने उन्हें हमेशा के लिए ज़िंदा कर दिया है। ऐसी शख्सियतें सदियों में पैदा होती हैं और सदियों तक लोगों के दिलों में जिंदा रहती हैं।
हकीम साहब की विरासत
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. इत्तेहाद आलम ने कहा कि हकीम अब्दुल हमीद साहब की सबसे बड़ी विरासत केवल उनके द्वारा स्थापित संस्थाएं नहीं, बल्कि उनकी सोच, उनके उसूल और समाज की सेवा का उनका जज़्बा है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को हकीम साहब की जिंदगी से मेहनत, ईमानदारी, दूरअंदेशी और इंसानियत की सेवा की प्रेरणा लेनी चाहिए। उनके मिशन को आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
फखरे अहमद शोबी ने कहा कि हकीम अब्दुल हमीद साहब की जिंदगी समाज सेवा और शिक्षा के प्रति समर्पण की बेहतरीन मिसाल है। उन्होंने कहा कि हकीम साहब ने जो विरासत छोड़ी है, वह आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।
खालिद नदीम ने कहा कि हकीम साहब ने जिस इल्मी और तालीमी बुनियाद को खड़ा किया था, वह आज एक मजबूत और विशाल इदारे की शक्ल में हमारे सामने है। जामिया हमदर्द उनकी दूरदर्शिता, मेहनत और बुलंद हौसलों का जीता-जागता उदाहरण है।
कार्यक्रम में डॉ. मेराज, डॉ रिज़वान डॉ राही,डॉ. दानिश, डॉ. निगार आलम, डॉ. राबिया बेगम, डॉ. संजीदा आलम, फरिया आलम, ज़िया, डॉ. वसीम रहमान, डॉ. आरिफ, आमिर सुल्तानी सहित अन्य लोग मौजूद रहे। उपस्थित वक्ताओं ने हकीम अब्दुल हमीद साहब की इल्मी, तालीमी, तिब्बी, अदबी और सामाजिक खिदमात को याद करते हुए उन्हें समाज के लिए एक महान प्रेरणास्रोत बताया।
कार्यक्रम का सफल संचालन अरशद रसूल ने किया। उन्होंने पूरे कार्यक्रम को व्यवस्थित एवं प्रभावशाली ढंग से आगे बढ़ाया तथा सभी वक्ताओं और अतिथियों को अपनी बात रखने का अवसर दिया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. राबिया बेगम ने सभी मेहमानों, वक्ताओं, शिक्षाविदों, चिकित्सकों एवं उपस्थित लोगों का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि फाउंडर्स डे का यह आयोजन केवल एक रस्मी कार्यक्रम नहीं, बल्कि हकीम अब्दुल हमीद साहब की महान सोच, उनके मिशन और उनकी विरासत को याद करने तथा उसे आगे बढ़ाने का संकल्प है।
अंत में हमदर्द तराना प्रस्तुत किया गया, जिसे सभी उपस्थित लोगों ने पूरे सम्मान और उत्साह के साथ सुना। कार्यक्रम का समापन हकीम अब्दुल हमीद साहब को उनके यौम-ए-पैदाइश पर दिल की गहराइयों से ख़िराज-ए-अकीदत पेश करते हुए किया गया।
“आपका मिशन, आपकी सोच और आपकी खिदमात हमेशा हमें रास्ता दिखाती रहेंगी।”


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